गुरु पूर्णिमा पर भाषण
(Hindi Speech on Guru Purnima)
मान्यवर मंच, आदरणीय गुरुजन, उपस्थित सभी महानुभावों और मेरे प्रिय साथियों,
आप सभी को मेरा नमस्कार
आज का यह दिन अत्यंत पावन और विशेष है, क्योंकि आज हम सब गुरु पूर्णिमा का पर्व मना रहे हैं — वह दिन जब हम अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण प्रकट करते हैं।
गुरु पूर्णिमा क्या है?
गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से महर्षि वेदव्यास जी की जयंती के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन किया और ज्ञान का अमूल्य खजाना हमें सौंपा। इसलिए इसे “व्यास पूर्णिमा” भी कहते हैं।
गुरु का अर्थ क्या है?
संस्कृत में ‘गुरु’ का अर्थ होता है —
‘गु’ यानी अंधकार, और ‘रु’ यानी प्रकाश।
अर्थात, गुरु वह होता है जो अज्ञान रूपी अंधकार को हटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है।
हमारे शास्त्रों में कहा गया है:
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय?
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।”
गुरु का महत्व
गुरु सिर्फ वह नहीं जो हमें किताबें पढ़ाता है, बल्कि वह है जो हमें जीवन जीने की कला सिखाता है, सही और गलत में फर्क समझाता है, और हर कठिन परिस्थिति में मार्गदर्शन करता है।
हमारे माता-पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक मार्गदर्शक — सभी किसी न किसी रूप में गुरु होते हैं। और गुरु पूर्णिमा वह अवसर है जब हम उन्हें धन्यवाद कहते हैं, उनका आशीर्वाद लेते हैं।
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इस दिन हम क्या कर सकते हैं?
अपने गुरुओं से मिलें, उनका सम्मान करें
उनके उपदेशों को जीवन में उतारें
कुछ समय आत्मचिंतन और आत्मसुधार में लगाएं
और सबसे जरूरी – गुरु के बताए मार्ग पर चलें
समारोप
गुरु पूर्णिमा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक भावना है — एक संबंध है जो हमें अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाता है।
आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी मिलकर संकल्प लें कि हम अपने गुरुजनों के दिखाए हुए रास्ते पर चलेंगे, उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएंगे, और जीवन को सार्थक बनाएंगे।
आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं!
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥”
धन्यवाद!


